उदयपुर को झीलों की नगरी, मेवाड़ की राजधानी और राजस्थान के सबसे सुंदर शहरों में से एक माना जाता है। यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक सिटी पैलेस, पिछोला झील, फतेहसागर झील, सज्जनगढ़ और जगदीश मंदिर जैसे प्रसिद्ध स्थलों को देखने आते हैं।
लेकिन इन सभी के बीच शहर के हृदय में स्थित एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर भी है, जो केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि उदयपुर की पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह धरोहर है – गुलाब बाग, जिसे आधिकारिक रूप से सज्जन निवास उद्यान कहा जाता है।
लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला गुलाब बाग उदयपुर का सबसे बड़ा सार्वजनिक उद्यान माना जाता है। यह केवल हरियाली से भरपूर पार्क नहीं, बल्कि मेवाड़ के शासकों की दूरदर्शिता, उद्यान कला, वनस्पति संरक्षण और सार्वजनिक जीवन के विकास की एक अनूठी कहानी भी अपने भीतर समेटे हुए है।
आज यहां हजारों लोग मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं, बच्चे खेलते हैं, पर्यटक घूमते हैं और प्रकृति प्रेमी घंटों इसकी छांव में समय बिताते हैं। लेकिन इस उद्यान का इतिहास जितना विशाल है, उतना ही रोचक भी है।
सज्जन निवास उद्यान की स्थापना
गुलाब बाग का इतिहास 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से शुरू होता है। मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह ने वर्ष 1881 में इस उद्यान की स्थापना करवाई।
उस समय उदयपुर तेजी से विकसित हो रहा था और महाराणा चाहते थे कि शहर में एक ऐसा सार्वजनिक उद्यान बनाया जाए जो केवल मनोरंजन का साधन न हो, बल्कि प्रकृति संरक्षण, वनस्पति संवर्धन और सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बने।
इसी सोच के साथ इस विशाल उद्यान का निर्माण किया गया और इसका नाम रखा गया सज्जन निवास उद्यान।
महाराणा सज्जन सिंह को प्रकृति, बागवानी और पर्यावरण से विशेष लगाव था। उनके शासनकाल में उदयपुर में कई विकास कार्य हुए, लेकिन सज्जन निवास उद्यान को उनकी सबसे दूरदर्शी परियोजनाओं में गिना जाता है।
गुलाब बाग नाम कैसे पड़ा?
हालांकि इस उद्यान का आधिकारिक नाम सज्जन निवास उद्यान था, लेकिन समय के साथ यह "गुलाब बाग" के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उद्यान के मध्य स्थित नवलखा महल के आसपास एक विशाल गुलाब वाटिका विकसित की गई थी। यहां बड़ी संख्या में गुलाबों की विभिन्न प्रजातियां लगाई गई थीं। दूर-दूर तक फैली गुलाबों की खुशबू और रंग-बिरंगी छटा इस उद्यान की पहचान बन गई।
इसी कारण लोगों ने पूरे उद्यान को "गुलाब बाग" कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यही नाम लोकप्रिय हो गया और आज भी उदयपुर में अधिकांश लोग इसे गुलाब बाग के नाम से ही जानते हैं।
कुछ पुराने अभिलेखों में इसे "बड़ा बाग" नाम से भी उल्लेखित किया गया है, लेकिन गुलाब बाग नाम सबसे अधिक प्रचलित हुआ।
मेवाड़ का वनस्पति उद्यान
गुलाब बाग केवल एक साधारण पार्क नहीं था। इसे उस समय के एक विशाल वनस्पति उद्यान के रूप में विकसित किया गया था।
यहां देश के विभिन्न भागों और कुछ विदेशी स्रोतों से भी पौधे मंगवाए गए। उद्यान में आम, अमरूद, अंगूर, नींबू, बेर, शहतूत, रायन, अनार, केला, चीकू, इमली, रामफल, लीची, अर्जुन, जामुन, करौंदा, बेल तथा अन्य अनेक प्रजातियों के वृक्ष लगाए गए।
यह व्यवस्था उस समय की वैज्ञानिक सोच को दर्शाती है। वर्ष 1882 में यहां पौधों के पास हिंदी, अंग्रेजी और उनके वैज्ञानिक नामों की पट्टिकाएं लगाई गई थीं। उस दौर में यह व्यवस्था भारत के अधिकांश उद्यानों में भी नहीं थी।
इससे स्पष्ट होता है कि गुलाब बाग केवल घूमने की जगह नहीं बल्कि वनस्पति अध्ययन और जनशिक्षा का केंद्र भी था।
दुर्लभ पौधों और वृक्षों की विरासत
गुलाब बाग में केवल सामान्य वृक्ष ही नहीं लगाए गए थे। यहां अनेक दुर्लभ और उपयोगी प्रजातियों को भी संरक्षित किया गया था।
पुराने विवरणों में रामफल, लीची, रायन, अर्जुन, शहतूत, करौंदा और कई अन्य दुर्लभ वृक्षों का उल्लेख मिलता है। उद्यान के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग प्रकार के वृक्षों के समूह बनाए गए थे ताकि लोग उन्हें पहचान सकें और उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 1886 में यहां पहली बार बोगनवेलिया का पौधा लगाया गया था। कुछ वर्षों में यह असाधारण रूप से विकसित हुआ और उद्यान की सुंदरता का प्रमुख आकर्षण बन गया।
वीथिकाएं: वृक्षों के बीच प्राकृतिक गलियारे
गुलाब बाग की सबसे विशिष्ट पहचान इसकी वीथिकाएं हैं।
वीथिका का अर्थ है वृक्षों की कतारों के बीच बना लंबा मार्ग। गुलाब बाग में विभिन्न वृक्षों पर आधारित अनेक वीथिकाएं विकसित की गई थीं।
यहां आम वीथिका, अमरूद वीथिका, चंदन वीथिका तथा अन्य वृक्षों पर आधारित प्राकृतिक पथ बनाए गए। इनमें से कई वीथिकाएं कई सौ मीटर लंबी हैं।
जब कोई व्यक्ति इन मार्गों पर चलता है तो दोनों ओर खड़े वृक्ष प्राकृतिक सुरंग जैसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि गुलाब बाग आज भी मॉर्निंग वॉक करने वालों का पसंदीदा स्थान है।
इन वीथिकाओं में कई जगह पर बाँस के बड़े-बड़े पेड़ों के झुंड भी मौजूद हैं जो आने वाले लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।
कमल तलाई: उद्यान की शांत आत्मा
गुलाब बाग के भीतर स्थित कमल तलाई इसकी सबसे सुंदर प्राकृतिक धरोहरों में से एक है।
ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि इस जलाशय के लिए विशेष रूप से कमल के बीज मंगवाए गए थे। उस समय कमल तलाई को उद्यान की सौंदर्य योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था।
पुराने विवरणों में यहां कुछ दुर्लभ जलीय पौधों का भी उल्लेख मिलता है। यह क्षेत्र केवल सजावटी नहीं था बल्कि वनस्पति संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था।
आज भी कमल तलाई का शांत वातावरण, जल में पड़ते वृक्षों के प्रतिबिंब और आसपास की हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है।
ऐतिहासिक बावड़ियां और जल प्रबंधन
मेवाड़ के शासकों ने जल संरक्षण को सदैव महत्व दिया। गुलाब बाग इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
उद्यान के भीतर लगभग 14 ऐतिहासिक बावड़ियां स्थित हैं। इनका उपयोग सिंचाई, जल संग्रहण और उद्यान की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता था।
उस समय जब आधुनिक जल प्रबंधन व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, तब ये बावड़ियां पूरे उद्यान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
आज भी कई बावड़ियों में पानी मौजूद है और वे गुलाब बाग की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं।
उदयपुर का ऑक्सीजन हब
गुलाब बाग को आज उदयपुर का "ऑक्सीजन हब" कहा जाता है।
हजारों वृक्षों और विशाल हरित क्षेत्र के कारण यह उद्यान शहर के पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां की हरियाली और जलाशय मिलकर एक विशिष्ट माइक्रो क्लाइमेट तैयार करते हैं।
गर्मियों में भी यहां का तापमान शहर के कई अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक सुखद महसूस होता है। यही कारण है कि स्थानीय लोग इसे उदयपुर के "हरे फेफड़े" भी कहते हैं।
गुलाब वाटिका का पुनर्जागरण
समय के साथ मूल गुलाब वाटिका का स्वरूप काफी बदल गया था। कई प्रजातियां नष्ट हो गईं और कुछ क्षेत्र उपेक्षित हो गए।
हाल के वर्षों में गुलाब वाटिका का पुनर्विकास किया गया। नई पौध तैयार कर विभिन्न प्रजातियों के गुलाब पुनः लगाए गए।
आज यहां 600 से अधिक गुलाब के पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 66 प्रकार की प्रजातियां शामिल हैं। इनमें कुछ दुर्लभ रंगों और विशेष किस्मों के गुलाब भी देखने को मिलते हैं।
इस पुनर्विकास ने गुलाब बाग को उसकी मूल पहचान से फिर जोड़ने का प्रयास किया है।
ज्योतिष उपवन और प्रकृति चिकित्सा
गुलाब बाग के आधुनिक आकर्षणों में नक्षत्र उद्यान भी शामिल है जिसे मिराज ज्योतिष उपवन के नाम से जाना जाता है।
इसे कई लोग एक्यूप्रेशर पार्क के नाम से जानते हैं। यहां विभिन्न राशियों और नक्षत्रों के आधार पर विशेष खंड बनाए गए हैं।
भारतीय ज्योतिष और प्रकृति चिकित्सा की अवधारणाओं पर आधारित यह उद्यान आधुनिक समय में स्वास्थ्य और प्रकृति के बीच संबंध को दर्शाता है।
कई मार्गों को इस प्रकार बनाया गया है कि उन पर नंगे पैर चलने से एक्यूप्रेशर जैसा अनुभव प्राप्त हो सके। यह स्थान स्वास्थ्य, अध्यात्म और प्रकृति के अनूठे संगम का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
विरासत और भविष्य
आज गुलाब बाग केवल उदयपुर का एक उद्यान नहीं है। यह मेवाड़ की दूरदर्शी सोच, पर्यावरण संरक्षण, वनस्पति विज्ञान और सार्वजनिक जीवन की विकास यात्रा का जीवंत दस्तावेज है।
महाराणा सज्जन सिंह द्वारा लगाए गए इस बीज ने समय के साथ एक विशाल विरासत का रूप ले लिया। यहां के वृक्ष, वीथिकाएं, कमल तलाई, बावड़ियां, गुलाब वाटिका और हरित वातावरण आज भी उस युग की याद दिलाते हैं जब प्रकृति और जनकल्याण को शासन की प्राथमिकता माना जाता था।
उदयपुर आने वाला कोई भी व्यक्ति यदि इस शहर की वास्तविक आत्मा को समझना चाहता है, तो उसे गुलाब बाग अवश्य देखना चाहिए। यह केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि मेवाड़ की प्रकृति-प्रेमी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
(क्रमशः — अगले भाग में पढ़ें: नवलखा महल, स्वामी दयानंद सरस्वती, विक्टोरिया हॉल संग्रहालय और सरस्वती पुस्तकालय की रोचक कहानी।)
