राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में आज भी कई ऐसे पुराने पहाड़ी रास्ते मौजूद हैं जिनसे कभी लोग, व्यापारी और स्थानीय ग्रामीण एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक जाया करते थे।
इन्हीं में से एक है भानपुरा की नाल, जिसे कई स्थानीय लोग कांबा की नाल भी कहते हैं। इस जगह को आकाथाक के नाम से भी जाना जाता है।
यह मार्ग कुम्भलगढ़ को रणकपुर से जोड़ने वाले सबसे छोटे रास्तों में से एक माना जाता है। आज भी यह सड़क कुम्भलगढ़ से वैरो का मठ, भानपुरा, कांबा और हाथीपुल होते हुए सीधे रणकपुर घाटी में उतर जाती है।
अरावली के बीच छिपा रोमांच
भानपुरा की नाल सामान्य पहाड़ी सड़क नहीं है। पूरी सड़क अरावली की ऊँची-नीची पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरती है।
रास्ते में लगातार हेयरपिन मोड़, तीखी चढ़ाई, गहरी उतराई और कई स्थानों पर केवल एक वाहन निकलने जितनी चौड़ी सड़क मिलती है। सामने से वाहन आने पर कई बार एक गाड़ी को पीछे हटकर रास्ता देना पड़ता है।
बरसात के मौसम में यह पूरा इलाका हरियाली से ढक जाता है और सड़क किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल जैसी दिखाई देती है। वहीं गर्मियों में सूखी अरावली की चट्टानें इस क्षेत्र का अलग ही प्राकृतिक सौन्दर्य प्रस्तुत करती हैं।
क्यों खास है यह रास्ता?
आज अधिकांश लोग सायरा होकर रणकपुर जाते हैं क्योंकि वह अपेक्षाकृत चौड़ा और सुरक्षित मार्ग है।
लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार भानपुरा–कांबा वाला रास्ता वर्षों से उपयोग में रहा है और पुराने समय में कुम्भलगढ़ तथा रणकपुर के बीच आने-जाने वाले ग्रामीण इसी मार्ग का उपयोग करते थे।
इस कारण इसे स्थानीय स्तर पर पुराने रास्ते के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि इस दावे के लिखित ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं।
रोमांच पसंद यात्रियों की पसंद
यदि आपको पहाड़ी ड्राइव पसंद है तो यह सड़क राजस्थान की सबसे खूबसूरत ग्रामीण घाटियों में गिनी जा सकती है।
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रास्ते भर अरावली की पहाड़ियाँ, घुमावदार मोड़, गहरी घाटियाँ और शांत वातावरण इसे यादगार बना देते हैं। ड्रोन से देखने पर इसकी सर्पाकार सड़क विशेष आकर्षक दिखाई देती है।
लेकिन खतरा भी कम नहीं
भानपुरा की नाल जितनी सुंदर है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।
सड़क अधिकांश स्थानों पर सिंगल लेन है।
लगातार तीखे हेयरपिन मोड़ आते हैं।
कई जगह सुरक्षा रेलिंग नहीं है।
बरसात में फिसलन और पत्थर गिरने की संभावना रहती है।
रात में यात्रा करने से बचना चाहिए।
पहली बार आने वाले चालक विशेष सावधानी रखें।
यात्रा का सही समय
यदि प्राकृतिक सौंदर्य देखना चाहते हैं तो जुलाई से सितम्बर का समय सबसे सुंदर माना जा सकता है। हालांकि बरसात में अतिरिक्त सावधानी आवश्यक है।
अक्टूबर से फरवरी तक मौसम सुहावना रहता है और सड़क अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।
निष्कर्ष
भानपुरा की नाल केवल एक शॉर्टकट नहीं, बल्कि अरावली की गोद में छिपा एक रोमांचक पर्वतीय मार्ग है। यह रास्ता आज भी कुम्भलगढ़ और रणकपुर के बीच स्थानीय संपर्क बनाए हुए है।
घुमावदार सड़क, शांत जंगल और प्राकृतिक घाटियाँ इसे राजस्थान के कम प्रसिद्ध लेकिन बेहद खूबसूरत मार्गों में शामिल करती हैं।
